हिरासत के मामलों में सब कुछ तेज़ी से होता है, और शुरुआती दिन सबसे अहम होते हैं। हम हिरासत केंद्र का पता लगाते हैं, संपर्क स्थापित करते हैं, और बॉन्ड सुनवाई (Bond Hearing) की तारीख़ तय करवाते हैं।
हिरासत केस का पूरा हिसाब बदल देती है। समय-सीमाएँ छोटी हो जाती हैं, सुनवाइयाँ जल्दी आती हैं, और जिस व्यक्ति को फ़ैसले लेने हैं, उसी तक पहुँचना सबसे मुश्किल होता है। शुरुआती घंटे अहम होते हैं: हिरासत केंद्र का पता लगाना, संपर्क स्थापित करना, और बॉन्ड सुनवाई (Bond Hearing) की तारीख़ तय करवाना।
हम बॉन्ड सुनवाई (Bond Hearing) और हिरासत पर पुनर्निर्णय (Custody Redetermination) की सुनवाइयों में पेश होते हैं, जहाँ कानून अनुमति देता है वहाँ रिहाई की माँग करते हैं, और हिरासत में होने वाली मुख्य सुनवाइयों (Merits Hearings) को उनके तेज़ समय के हिसाब से संभालते हैं। परिवारों को पूरे समय उनकी अपनी भाषा में जानकारी दी जाती है, क्योंकि बेख़बर रखा जाना अपने आप में एक तरह का नुक़सान है।
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